जब मन की स्थिति अस्थिर हो जाये तो भगवान का ध्यान करके मन को स्थिर किया जा सकता है; महाराज चारविंदा दास तीर तरकाडी

जब मन की स्थिति अस्थिर हो जाये तो भगवान का ध्यान करके मन को स्थिर किया जा सकता है; महाराज चारविंदा दास तीर तरकाडी

फगवाड़ा ( डॉ रमन / हरदयाल सिंह संधू ) यह जिंदगी सिर्फ कुछ पल की है, इसे प्यार, नम्रता, सम्मान और खुले मन से जीना चाहिए उक्त विचार महाराज चदविंदा दास तीर तरकड़ी जी (सतीगुर दर्शन धाम अलीपुर दिल्ली) ने गीता भवन मंदिर मॉडल टाउन फगवाड़ा में आयोजित भव्य आध्यात्मिक कीर्तन सत्संग कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किये।उन्होंने कहा कि यह जीवन हमें ईश्वर को जानना है और ईश्वर को जानकर इस जीवन को सफल बनाना है। हमें संसार में रहते हुए और मानव जीवन में अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए सदैव इस ईश्वर का भाव रखना है और एक अच्छा और शांतिपूर्ण जीवन जीना है। यदि स्थिति मन अस्थिर हो जाता है तो भगवान का साक्षात्कार करते हुए ध्यान करने से मन को स्थिर किया जा सकता है क्योंकि भगवान सदैव स्थिर रहते हैं उन्होंने कहा कि हर इंसान एक समान है, कोई ऊंचा या नीचा नहीं है, हम एक-दूसरे से प्यार करके खुशहाल जीवन जी सकते हैं। बाबा सूरमा सिंह, दास सरमुख (महासचिव दिल्ली) दास तरसेम, दास कुलवंत लुधियाना कमेटी, दास प्रदीप, सन्नी ,पुनीत, विशाल मानोता, कंचन, चंदन, सुषमा शर्मा, रजनी, मंदीप, जश्न मनोता, निर्मल मनोता, रौनक संसोय आदि एवं बड़ी संख्या में संगत उपस्थित थी

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