LAC: सीमांत इलाकों में आधुनिक गांव बसा रहा चीन, भारत की सुरक्षा पर बड़ा खतरा
नई दिल्ली: चीन ने भारत की सीमा यानी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर सुरक्षा की एक दीवार खड़ी करने का अपना बहुउद्देशीय कार्यक्रम लगभग पूरा कर लिया है. पूरी एलएसी पर चीन ने Xiaokang border defence villages यानी खुशहाल गांवों को स्थापित किया है. इन गांवों में हान वंशी चीनियों के अलावा चीनी सेना से रिटायर हुए तिब्बती मूल के लोग और तिब्बती कम्युनिस्टों को बसाया है. ये गांव पूरी एलएसी पर चौकसी, जासूसी और चीनी सेना के अभियानों के बेस की तरह इस्तेमाल किए जाएंगे. ये गांव पूर्वी लद्दाख के सामने रुतोग से लेकर अरुणाचल के सामने निंगची तक में बसाए जा रहे हैं. डोकलाम के सामने भी ऐसा एक बड़ा गांव बनाया गया है.
डोकलाम विवाद के बाद चीन ने बनाई रणनीति
भारत के साथ 72 दिनों तक चले डोकलाम विवाद के बाद 2017 में चीनी राष्ट्रपति ने ऐसे गांव बनाने की अपनी योजना साफ कर दी थी. तब शी जिनपिंग ने 19 वीं पार्टी कांग्रेस के बाद निंगची प्रोविंस के एक गांव में रहने वाली दो बहनों को एक पत्र लिखा था जिसमें इस तरह के गांव स्थापित करने का वादा किया था. इन गांवों को तिब्बत से गरीबी खत्म करने की योजना के नाम से प्रचारित किया गया जैसे इन गांवों के नाम से भी जाहिर है. इन गांवों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल जैसी 10 मूलभूत सुविधाएं देने का भी वादा किया गया है. लेकिन इन गांवों को बसाने का उद्देश्य एलएसी के एकदम पास नागरिकों की शक्ल में चीनी जासूसों और सैनिकों को रखने की पक्की व्यवस्था करना है.
गांवों की रणनीतिक स्थिति से भारत की बढ़ी चिंता
इन गांवों की रणनीतिक स्थिति भारत के लिए चिंता की एक बड़ी वजह है. भारत की सीमा पर 21 सीमा प्रदेशों में पिछले तीन साल में 650 से ज्यादा ऐसे गांव बस चुके हैं और इनमें ढाई लाख से ज्यादा लोगों को बसाया जा चुका है. इनमें से 200 से ज्यादा गांव भारतीय सीमा से कुछ किलोमीटर पास तक बसाए गए हैं. ये गांव पूर्वी लद्दाख रुतोग, न्याग्री से लेकर डोकलाम के पास और अरुणाचल प्रदेश से सटे निंगची तक यानि पूरी एलएसी पर फैले हुए हैं. सिक्किम में भारत, भूटान और चीन की सीमा मिलने के स्थान यानि ट्राइ जंक्शन पर भी ऐसे गांव बसाए गए हैं. यहां कई गांव ऐसे हैं जो भूटान की जमीन पर बसा दिए गए हैं.
तिब्बतियों पर नजर रखेंगे ये गांव
इन गांवों का एक उद्देश्य तिब्बत में चीन के विरोध की घटनाओं पर नजर रखना और ऐसे तिब्बतियों को पकड़ना जो चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ विद्रोह कर सकते हैं. तिब्बत से कई बार आम तिब्बती बेहद खतरा उठाकर एलएसी पार करते हैं और भारत में शरण लेते हैं. कई बार तिब्बती दलाई लामा के दर्शनों के लिए भी भारत आते हैं. इन गांवों में बसाए गए चीनी और चीन के वफादार तिब्बती सीमा पार करने की घटनाओं पर रोक लगाएंगे. इन गांवों के जरिए तिब्बतियों के तिब्बत के अंदर के आवागमन पर भी अंकुश लगाया जा सकेगा क्योंकि ये गांव उन जगहों पर बसाए गए हैं जहां पुलिस या सेना की स्थाई मौजूदगी नहीं होती. हर गांव में कम से कम एक कम्युनिस्ट पार्टी वर्कर भी रहेगा जो तिब्बती गांव वालों का ब्रेन वॉश करेगा और उन्हें कम्युनिज्म में दीक्षित करेगा.
तिब्बत की संस्कृति को नष्ट करने की तैयारी
ये पार्टी वर्कर पास मौजूद चीनी सेना की किसी यूनिट से भी संपर्क में रहेगा और समय-समय पर उन यूनिट में काम करने वाला राजनीतिक दल भी गांव में आएगा. तिब्बती युवाओं के अर्धसैनिक बलों में भर्ती के अभियान के अलावा ये चीन की ऐसी योजना है जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा तो है ही, ये तिब्बत के अस्तित्व और संस्कृति को नष्ट करने का दूरगामी प्रयास है.

