भारत ने पहले ही पास कर दी थी एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन, अब डब्ल्यूएचओ की भी लगी मुहर
नई दिल्ली । कोविड-19 से एक वर्ष से अधिक समय से जूझ रही दुनिया के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। ये खबर इसकी वैक्सीन से जुड़ी है। दरअसल, विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक्सपर्ट पैनल ने कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन की रोकथाम के लिए ऑक्सफॉर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को सही मानते हुए इस पर मुहर लगा दी है। इस एक्सपर्ट पैनल का कहना है कि इस वैक्सीन को उस मरीज को देना सही कदम है जो कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन से संक्रमित है। भारत की ही बात करें तो इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर जेए जयलाल का कहना है कि सरकार ने यहां पर एस्ट्राजेनेका/ऑक्सफॉर्ड दोनों की ही वैक्सीन को मंजूरी दे रखी है। जहां तक इन वैक्सीन को लोगों को लगाने की बात है तो जहां जिसकी उपलब्धता है उसके हिसाब से भारतीय वैक्सीन और इन वैक्सीन को लगाया जा रहा है।
उनके मुताबिक विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से सामने आने वाली ये खबर निश्चिततौर पर उन देशों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जहां पर वायरस का नया स्ट्रेन समस्या खड़ा कर रहा है। संगठन की तरफ से इस वैक्सीन की दो खुराक को 12 सप्ताह के अंतराल पर देने की सिफारिश की है। इसी तरह की सिफारिश ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने भी की थी। हालांकि उनकी इस सिफारिश को जर्मनी के विशेषज्ञों ने गलत बताया था। इसके अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ये भी कहा है कि ये वैक्सीन 65 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों पर भी असरदार है। हालांकि संगठन के एक्सपर्ट पैनल ने इसको गर्भवति और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को देने की सिफारिश अभी नहीं की है।
आपको बता दें कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस की शुरुआत से लेकर अब तक इसके करीब 4 हजार म्यूटेशन सामने आ चुके हैं। सरल भाषा में कहा जाए तो इस वायरस में लगातार बदलाव हो रहा है। ये बदलाव मरीजों पर विभिन्न लक्षणों के रूप में सामने आता है। जहां तक इस वायरस के नए स्ट्रेन की बात है तो इसका पहला मामला ब्रिटेन में सामने आया था। इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए ब्रिटेन के कुछ हिस्सों में आंशिकतौर पर तो कुछ में पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया।
ब्रिटेन की ही बात करें तो वहां पर इस वायरस की रोकथाम के लिए एक नए शोध को भी अंजाम दिया जा रहा है। इसमें वॉलेंटियर्स को दो अलग-अलग कोरोना वैक्सीन की खुराक दी जा रही हैं। एक वर्ष से कुछ अधिक समय तक चलने वाले इस शोध के जरिए वैज्ञानिक ये देखने की कोशिश कर रहे हैं कि इन वैक्सीन की मिश्रित खुराक देने से मरीजों पर क्या असर पड़ेगा। वो ये भी देखना चाहते हैं कि इन वैक्सीन की मिश्रित खुराक के जरिए शरीर में एंटीबॉडीज कितने दिन में बनती हैं और वो कितने समय तक शरीर में बनी रह सकती हैं। आपको बता दें कि एंटीबॉडीज शरीर में किसी रोग के प्रति लड़ने में मदद करती हैं। ये शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती हैं।
अब तक हुए शोध और विश्लेषण में ये बात भी सामने आई है कि विभिन्न कोरोना वैक्सीन से बनी प्रतिरोधक क्षमता या एंटीबॉडीज करीब तीन माह तक काम करती हैं। अब तक इस वायरस की रोकथाम को लेकर जितनी वैक्सीन सामने आई हैं उनका असर शरीर पर एक माह के बाद शुरू होता है। वहीं इन वैक्सीन का प्रतिकूल असर भी कम देखने को मिला है। एस्ट्राजेनेका वैक्सीन की ही बात करें तो दक्षिण अफ्रीका से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि ये दवा बुजुर्गों पर कारगर साबित नहीं हो रही है। इसके बाद यहां पर इसके बुजुर्गों पर इस्तेमाल के लिए रोक लगा दी गई थी।
यहां पर ये बात इसलिए खास है क्योंकि जर्मनी में इसी तरह के आंकड़े सामने आने के बाद इस वैक्सीन को 60 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के लोगों को देने पर रोक लगा दी गई है। हालांकि वैक्सीन के ट्रायल चीफ एंड्रयू पोलार्ड ने कुछ ही दिन पहले कहा था कि उन्हें अब तक इस बात के कोई सुबूत नहीं मिले हैं कि इस आयुवर्ग पर वैक्सीन का कोई प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। वहीं ब्रिटेन की बात करें तो वहां पर इस तरह की कोई रोक इस वैक्सीन पर नहीं लगाई गई है। यहां पर एक बात बतानी और जरूरी हो जाती है कि चीन ने अपनी फार्मा कंपनी सिनोफार्म की बनाई कोरोना वैक्सीन को भी साठ वर्ष से अधिक आयु वर्ग पर इस्तेमाल की इजाजत नहीं दी है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक्सपर्ट पैनल के प्रमुख आलेहांद्रा क्रैविओतो की तरफ से कहा गया है कि दक्षिण अफ्रीका में इस वैक्सीन को लेकर किया गया अध्ययन व्यापक नहीं था। इस अध्ययन में 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की संख्या काफी कम थी। संगठन की प्रमुख वैज्ञानिक सौम्या विश्वनाथन ने भी दुनिया से इसका इस्तेमाल करने की अपील की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े बताते हैं कि कोविड-19 वैक्सीनों की अब तक 12.80 करोड़ खुराक लोगों को दी जा चुकी हैं। संगठन के मुताबिक वैक्सीनेशन प्रक्रिया का करीब तीन चौथाई भाग दुनिया के दस धनी और विकसित देशों में हुआ है।

