अगर अकाली दल किसानों का हितैषी है तो मोदी सरकार से नाता तोड़ेः बलबीर सिद्धू

चंडीगढ़: शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल पर कृषि अध्यादेशों सम्बन्धी दोगली राजनीति करने का दोष लगाते हुए पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा है कि अगर वह किसानों और पंजाब के हितों के प्रति सच्ची भावना रखते हैं तो वह किसानी को तबाह करने के रास्ते पड़ी हुई केंद्र की मोदी सरकार से तुरंत अपना नाता तोड़ें। उन्होंने कहा कि अगर शिरोमणि अकाली दल भाजपा से अपना गठजोड़ तोडक़र केंद्र सरकार से बाहर नहीं आती तो वह यह किसान विरोधी कानून बनाने की अपनी जि़म्मेंदारी से भाग नहीं सकता।

सिद्धू ने कहा, ‘‘सुखबीर बादल द्वारा कल लोकसभा में ज़रूरी वस्तुओं सम्बन्धी बिल के विरोध में दिए गए कुछ मिनटों के भाषण के तब तक कोई मायने नहीं हैं जब तक शिरोमणि अकाली दल मोदी सरकार में हिस्सेदार बना हुआ है। अकाली दल की त्रासदी यह है कि वह किसानों में अपनी पैठ भी बनाना चाहती है और केंद्र सरकार में मिली हुई एक मामूली सी वज़ीरी भी नहीं छोडऩा चाहता। परन्तु उसकी यह दो नावों में सवार होने की गुमराह करने वाली नीति कतई कामयाब नहीं होगी, क्योंकि जनता सब कुछ जानती है।’’स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल के प्रधान द्वारा कल लोकसभा में ज़रूरी वस्तुएं संबंधी बिल के विरोध में लिया गया स्टैंड लोगों की आँखों में धूल झोंकने का ही नया पैंतरा है। अकाली दल ने यह पैंतरा भारतीय जनता पार्टी के साथ पर्दे के पीछे हुए समझौते के बाद ही लिया है, जिसके अंतर्गत अकाली दल सिर्फ मुँह रखने के लिए ही इन अध्यादेशों का विरोध करेगा और भारतीय जनता पार्टी इस विरोध को नजऱअंदाज़ करेगी।

सिद्धू ने कहा कि सुखबीर सिंह बादल का यह कहना सरासर गलत है कि कृषि अध्यादेशों को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा मंज़ूरी देने के समय हरसिमरत कौर बादल ने गंभीर अंदेशे प्रकट किए थे। उन्होंने कहा कि अभी दो दिन पहले तक तो सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल समेत पूरा अकलाी दल कृषि अध्यादेशों की डटकर हिमायत कर रहा था। स. सिद्धू ने कहा कि अकाली दल तो बुज़ुर्ग नेता प्रकाश सिंह बादल से भी इन अध्यादेशों के हक में बयान दिलाकर उनके बची-खुची प्रतिष्ठा को चोट लगाने की हद तक चला गया था। अकाली दल द्वारा अब विरोध किया जाना नया पैंतरा, पंजाब में कृषि अध्यादेशों के खि़लाफ़ उठे ज़बरदस्त लोगों के गुस्से के डर में से निकला है।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि सुधारों के नाम पर बनाए जा रहे नए कानून छोटे और मध्यमवर्गीय किसानों को दयनीय हालत में पहुँचा देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह कानून भारतीय संविधान के संघीय स्वरूप और भावना के बिल्कुल उलट हैं।

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