तालिबान के कब्जे के बाद गृहयुद्ध की चपेट में आ सकता है अफगानिस्तान, विशेषज्ञों ने जताई गहरी चिंता

वाशिंगटन । अफगानिस्तान में हालात तेजी से बेकाबू होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान गृहयुद्ध की चपेट में आ सकता है। राजनीतिक टिप्पणीकार हरलन उल्मन ने कहा है कि तालिबान की अफगानिस्तान पर जीत का मतलब अफगानिस्तान के लिए बेहतर भविष्य नहीं बल्कि वहां गृहयुद्ध के हालात पैदा हो सकते हैं क्योंकि स्थानीय गृहयुद्ध और आतंकवादी समूह के खिलाफ विद्रोह हो सकते हैं। द हिल में एक ओपिनियन पीस में, अटलांटिक काउंसिल के एक वरिष्ठ सलाहकार उल्मैन ने कहा कि कुछ लोगों ने भविष्यवाणी की थी कि अफगानिस्तान का पतन अचानक होगा। जबकि अब तालिबान का नियंत्रण देश के लगभग 85 प्रतिशत तक बढ़ चुका है।

उलमैन ने कहा कि जाहिर है अगर काबुल सरकार गिरती है या सत्ता छोड़ती है राष्ट्र-निर्माण और लोकतंत्र फिर से हार जाएगा। इसी तरह तालिबान की जीत का मतलब उस देश के लिए बेहतर भविष्य नहीं है। बहुत संभावना है तालिबान का शासन अलग-अलग प्रांतों पर होगा।

उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में स्थानीय योद्धा सत्ता में बने रहेंगे। तालिबान को समायोजित करेंगे या नियंत्रण के अपने सीमित क्षेत्रों से परे पहुंच से कट-ऑफ करके गला घोंटना झेलेंगे। यह तालिबान के खिलाफ गृहयुद्ध और विद्रोह को तेज कर सकता है। तालिबान शासन की क्रूरता और दशकों की हिंसा और संघर्ष के बाद भी अफगानों की लड़ाई जारी रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा कि आगे के हालात कैसे रहेंगे।

उलमैन का मानना ​​है कि पाकिस्तान इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस डायरेक्टोरेट (आईएसआई) के माध्यम से तालिबान पर अधिक प्रभाव डालने का प्रयास करेगा। उलमैन ने लिखा कि अमेरिका को अफगानिस्तान तालिबान के समर्थन को नकारने में पाकिस्तान के पिछले दोहरेपन के बारे में कोई भ्रम नहीं है। और, जैसे-जैसे वहां चरमपंथ बढ़ता है, वैसे ही पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की सुरक्षा के बारे में पश्चिमी चिंताएं भी बढ़ेंगी।

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