मसोल: पंजाब का आखिरी गांव, यहां डर कोरोना का नहीं, बुनियादी सुविधाओं के अभाव का है

सार

मसोल में पहले करीब 300 घर हुआ करते थे। लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां के काफी लोग दूसरी जगह चले गए हैं। इस कारण गांव में सैकड़ों घर खंडहर पड़े हैं।

विस्तार

मसोल हरियाणा की सीमा पर बसा पंजाब का आखिरी गांव है। इस गांव का मुकद्दर आजादी के इतने साल बाद भी नहीं बदला। यहां न तो पक्का रास्ता है, न परिवहन सुविधा। कोरोना से बचाव के बारे में पूछे जाने पर एक निवासी ने तंज कसा कि साहब यहां तो लोग ही मुश्किल से पहुंच पाते हैं, कोरोना तो दूर की बात है।

मसोल में पहले करीब 300 घर हुआ करते थे। लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यहां के काफी लोग दूसरी जगह चले गए हैं। इस कारण गांव में सैकड़ों घर खंडहर पड़े हैं। गांव की सरपंच नीमा कौर के पति लेख सिंह ने बताया कि गांव में केवल 85-90 घर ही बचे हैं। लेख सिंह ने बताया कि कई सरकारें बदली। लेकिन किसी भी सरकार का ध्यान हमारे गांव की तरफ नहीं गया। यहां सिर्फ 2-3 घंटे ही बिजली आती है। उसमें भी वोल्टेज इतनी कम होती है कि पंखा भी नहीं घूमता।

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