Drugs Problem in Punjab: झकझोर देती है जालंधर के मनी, रविंदर और अमनजोत जैसे युवाओं की मौत की दास्तां
जालंधर- पंजाब की जवानी को नशा खाए जा रहा है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से रहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह का छह महीने में नशा तस्करी खत्म करने का दावा लगातार हो रही युवाओं की मौत से खोखला साबित हो रहा है। पंजाब की जवानी को बचाने के लिए अगर अब भी सरकार, पुलिस प्रशासन नहीं जागा तो बहुत देर हो जाएगी और इसका नतीजा आने वाली कई पीढ़ियां भुगतेंगी। हाल में जालंधर के कुछ युवाओं की नशे की ओवरडोज से मौत इसका जीता जागता प्रमाण है। रविवार को फिल्लौर में 17 वर्षीय युवक मनी की नशे से मौत हो गई। मनी के पिता की एक साल पहले ही मौत हुई थी। वह परिवार का इकलौता सहारा था। मनी नशा छोड़ना चाहता था लेकिन गलत संगत के कारण ऐसा नहीं कर सका। शुक्रवार को दोस्तों के साथ गए मनी ने फिर नशा किया और उसकी मौत हो गई।
एक महीना पहले शहर के गाजी गुल्ला इलाके 34 वर्षीय रविंदर की मौत भी नशे से हुई थी। परिजनों का आरोप था कि उसके दोस्त उसे साथ ले गए और नशा करवा दिया था। उससे पहले नशा छुड़ाओ केंद्र से इलाज करवाकर लौटे भोगपुर के गांव जमालपुर के अमनजोत की लाश के पास भी सिरिंज पड़ी मिली थी। नशे से मौत के ऐसे ही कुछ मामले आए दिन सुनने को मिल रहे हैं।
नशे के लिए संवेदनशील थानों की संख्या जालंधर में सबसे ज्यादा
पिछले दो साल की बात करें तो दो हजार से ज्यादा मामले पुलिस दर्ज कर चुकी है। दो हजार से ज्यादा लोगों को नशे के साथ गिरफ्तार भी किया गया, उसके बावजूद न नशे पर लगाम नहीं लग रही। प्रदेश में नशे के लिए संवेदनशील थानों की गिनती में जालंधर पहले नंबर पर है। पुलिस का दावा है कि शहर को क्राइम मुक्त बनाया जा रहा है लेकिन हकीकत इससे अलग है। नशे के मामलों में सरकार ने राज्य के 30 फीसद पुलिस थानों को संवेदनशील करार दिया है। राज्य के 422 पुलिस थानों में से 124 ऐसे हैं, जहां नशे की बिक्री के मामले सबसे अधिक आते हैं। इनमें से 27 संवदेनशील थाने जालंधर में ही हैं। 22 थानों के साथ फिरोजपुर दूसरे व 18 संवेदनशील थानों के साथ लुधियाना तीसरे स्थान पर है। उसी कारण एसटीएफ को जालंधर पर विशेष ध्यान देने के आदेश हए थे।
नए-नए तरीकों से हो रही तस्करी
तस्कर नशा सप्लाई करने के लिए नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। कभी मछली के पेट में तो कभी जूतों के तलवों में नशा छिपाकर लाए तस्कर पुलिस ने काबू किए हैं। ट्रकों के स्पेशल बाडी पार्ट्स बनाकर, फल सब्जियों के बीच छिपाकर, वाहनों को माडीफाई करवा कर नशा सप्लाई किया जा रहा है। महिलाएं तो अपने शरीर पर नशा बांध कर सप्लाई कर रही हैं।
नशा तस्करी में विदेशियों का वर्चस्व
दो साल में नशा तस्करी के मामले में पुलिस ने दो सौ से ज्यादा विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनमें भी पचास से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।
इन इलाकों में सरेआम बिकता है नशा
शहर के ढन्न मोहल्ला, काजी मंडी, बस्ती शेख, बस्ती नौ, अजीत नगर, घास मंडी चौक, चौगिट्टी, माडल हाउस, आबादपुरा, नींवी आबादी, इंडस्ट्री एरिया, सईपुर, लम्मा पिंड चौक, लक्कड़ बाजार, अली मोहल्ला, गोपाल नगर, भार्गव कैंप सहित शहर के कई इलाके ऐसे हैं, जहां सरेआम नशा बिकता है।

