आज ट्रेड यूनियनों के साथ जिला मुख्यालयों के रेलवे स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करेंगे किसान
सार
•पंजाब के सुल्तानपुर लोधी में आयोजित महारैली में किसानों का एलान-‘मरते दम तक करेंगे संघर्ष।’
•जींद के नरवाना में भाजपा के प्रशिक्षण शिविर में विरोध जताने पहुंचे किसान।
विस्तार
ट्रेड यूनियनों के साथ किसान सोमवार को जिला मुख्यालयों के रेलवे स्टेशन के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान डीसी व एसडीएम को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। वहीं अंबाला में भी किसान ट्रेड यूनियनों के साथ मिलकर पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के विरोध में प्रदर्शन करेंगे। इसके बाद 19 मार्च को अनाज मंडियों के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
इधर, पंजाब के सुल्तानपुर लोधी (कपूरथला) की दाना मंडी में किसान मजदूर संघर्ष कमेटी पंजाब के आह्वान पर रविवार को महारैली हुई। जिसमें किसानों ने एलान किया कि कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए मरते दम तक संघर्ष किया जाएगा। रैली की अध्यक्षता सुल्तानपुर लोधी जोन के प्रधान सरवन सिंह बाऊपुर, जोन भाई लालू जी के प्रधान परमजीत सिंह अमरजीतपुर व सुखप्रीत सिंह रामे ने की।
महारैली में शेर-ए-पंजाब महाराज रणजीत सिंह यूथ क्लब (जर्मनी) ने शहीद नवरीत सिंह डिबडिबा के परिवार समेत पांच परिवारों को 51-51 हजार और गांव डडविंडी (कपूरथला) के शहीद परिवार को एक लाख रुपये की नकद राशि से सम्मानित किया। इस दौरान दो मिनट का मौन भी रखा गया। किसान नेताओं ने कहा है कि दिल्ली की सरहदों पर चल रहे देशव्यापी आंदोलन को और तेज करने के लिए 26 मार्च को पंजाब पूरी तरह बंद किया जाएगा।
वहीं, पटियाला में किरती किसान यूनियन के यूथ विंग, पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन और नौजवान भारत सभा की ओर से रविवार को शहर में किसानों के समर्थन में मोटरसाइकिल मार्च निकाला गया। इस दौरान 23 मार्च को दिल्ली बॉर्डर पर जाने की लोगों से अपील की गई। इस बीच मुक्तसर की मजदूर नेता नौदीप कौर ने अपील की कि महिलाएं व युवा इस संघर्ष को मजबूत करने के लिए आगे आएं। सरकार ने एक योजना के तहत उन्हें जेल में डाला कि ये मजदूर लोग हैं, डर जाएंगे लेकिन हुआ इसके उलट।
अब यह संघर्ष जन आंदोलन का रूप ले चुका है। मरते दम तक इस संघर्ष को जारी रखा जाएगा। उधर, रेवाड़ी के खेड़ा बॉर्डर पर किसानों को समर्थन देने अलवर व दौसा से किसानों का एक जत्था पहुंचा। वहीं झज्जर के गुरुकुल महाविद्यालय के पास किसानों ने जेजेपी व बीजेपी के नेताओं के विरोध में दूसरे दिन भी धरना दिया। हालांकि दूसरे दिन किसी भी नेता के आने का कार्यक्रम नहीं था।

