51 फीसद तेजस जहाज में देशी रडार, दुश्मन के ठिकानों को पहचनाने और सटीक निशाना लगाने में है माहिर

भारत रक्षा क्षेत्र में देशी तकनीक और देशी अविष्कार पर जोर दे रहा है. 123 तेजस फाइटर में लगभग 51 फीसद में देशी रडार लगेगा. उत्तम रडार को भारत में ही बनाया गया है. यह रडार इजरायल के रडार को रिप्लेस करेंगे. इसके पहले बैच के जहाज इस भारतीय तकनीक से लैस होंगे. भारतीय वायुसेना को दिये जाने वाले 123 तेजस में से 40 तैयार हैं बाकि के 83 तेजस फरवरी तक तैयार होंगे.
डीआरडीओ के चेयरमैन सतीष रेड्डी ने एक अंग्रेजी वेबसाइट से बातचीत के दौरान कहा, 21 वीं सदी के तेजस में हमने उत्तम रडार लगाया है. इस रडार ने हमारे परीक्षण में अच्छा काम किया है. . हमने एमओयू किया है. इसका अर्थ है कि 83 में से 63 में देशी रडार लगेगा. इस रडार का निर्माण बेंगलुरु में हुआ है.

यह रडार दुश्मन के ठिकानों को पहचानने और वहां से हाई रिजोल्यूशन में तस्वीर लेने में सक्षम हैं. तेजस में पहले इजरायली कंपनी का डएलटीए का रडार था जिसे अब बदला जा रहा है. इस रडार की खासियत है कि हवा में, जमीन में और समुद्र में सटीक निशाना लगाने में सक्षम है. इसे दूसरे रडार की तुलना में सबसे सर्वश्रेष्ठ बताया जा रहा है. यह दुश्मनों के ठिकानों की तलाश भी करेगा और दुश्मन के रडार से खुद को बचाकर भी रखेगा. यह एक साथ दुश्मन के कई ठिकानों की तलाश कर रहा है.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डिफेंस पर बजट प्रस्तावों पर आज चर्चा में भारत को डिफेंस के मामले में और सक्षम बनाने पर जोर दिया. वेबिनार को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियार और मिलिट्री उपकरण बनाने का सदियों पुराना अनुभव है.

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