अमृतसर के लाल नरेंद्र चंचल: भजन गाने से इन्कार करने पर चली गई थी भजन सम्राट की आवाज

अमृतसर : नरेंद्र चंचल को भजन सम्राट की संज्ञा यूं ही नहीं मिल गई। अपने करियर में उन्होंने हजारों भजन गाए और शोहरत की बुलंदी पर पहुंचे। उनकी आवाज के करोड़ों लोग दीवाने हैं, लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब भजन सम्राट की आवाज ही चली गई। किस्सा आगरा का है। नरेंद्र चंचल इसके लिए अपनी गलती को जिम्‍मेदार मानते थे। उन्‍होंने अपनी भूल को सुधारा तो उनकी आवाज लौट आई।

करियर में आवाज की तरह कभी नहीं आया उतार, अंत तक गाते रहे

एक इंटरव्यू में नरेंद्र चंचल ने कहा था, ‘बॉबी फिल्म में गाना गाने के बाद  दिमाग पर यह नशा बैठ गया था कि बहुत बड़ा गायक बन गया हूं। इसके बाद मैंने जगराते वालों को ना कहना शुरू कर दिया था। मुझे एक स्टेज शो के लिए आगरा जाना था, जो फिल्मी गानों पर बेस्ड था। मैंने वहां जाने से पहले काली माता के मंदिर में माथा टेका। वहां किसी ने भजन सुनाने के लिए कहा तो मैंने तबीयत ठीक न होने का बहाना बना दिया था।’

भजन सम्राट नरेंद्र चंचल ने बताया था, ‘ उसी रात मेरे गुरु जैसे एक काली भक्त का मैसेज आया और उन्होंने मुझे मिलने के लिए बुलाया। मैंने फिर तबीयत खराब होने का बहाना बना दिया। दूसरे दिन आगरा निकलने से पहले मेरी आवाज बिल्कुल बंद हो गई। मैं समझ चुका था कि मुझे सजा मिली है। क्योंकि, जिस मंदिर ने मुझे इतना सब दिया, वहीं मैं तबीयत खराब होने का बहाना बना रहा हूं।

चंचल ने बताया था, एक महीने बाद मुझे शहर में ही भजन गाने का मौका मिला। तब से मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मेरे दिमाग से फिल्म सिंगर होने का भूत उतर चुका था। मेरी प्राथमिकता जगराते बन चुके थे।’ दिल्ली में शिफ्ट होने के बाद हर साल वह जगराता करने अमृतसर आते थे।

नरेंद्र खरबंदा को ऐसे मिला ‘चंचल’ नाम
नरेंद्र चंचल का असली नाम नरेंद्र खरबंदा था। एक टीवी इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वह बचपन में बहुत शरारती थे। अपने सीनियर्स से काम करवाया करते थे। उनके कालेज के दिनों में उनके शिक्षक शास्त्री जी ने इन्हीं शरारतों के कारण ‘चंचल’ नाम दिया। यह नाम उनके जीवन का हिस्सा बन गया। चंचल अपने जीवन के अंत तक भजन गाते रहे।

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