यौम-ए-आशूरा (दस मुहर्रम)आज का दिन इस्लाम के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है : अख्तर सलमानी
जालंधर: , यौमे आशूरा 10 मोहर्रम आज 30 अगस्त दिन इतवार को है इस दिन को अल्लाह और उसके नबियों ने भी महत्वता दी है, इसी दिन इस्लाम के इतिहास का सबसे बड़ा हादसा हज़रत इमाम हुसैन रज़ि. की शहादत का हादसा पेश आया। यह बात ऑल इंडिया जमात ए सलमानी बिरादरी के पंजाब चेयरमैन अखतर अली ने आज दस मुहर्रम की पूर्व संध्या पर सय्यद याक़ूब हुसैन नक़वी के साथ मीडिया से बातचीत के दौरान कहीं। उन्होंने ने कहा कि इस दिन मुसलमानों को चाहिए कि वह रोज़ा रखें, गरीबों की मदद करें। इतिहास में आज के दिन के साथ बहुत से बड़े घटनाक्रम जुड़े हुए हैं। लेकिन हजरत इमाम हुसैन की शहादत से इस दिन की फजीलत और बढ़ जाती है ,सैयद याकूब हुसैन नकवी ने कहा कि मुहर्रम की दस तारीख को नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन रज़ि को केवल इस कारण शहीद कर दिया गया था कि उन्होंने एक ज़ालिम के सामने अपना सर झुकाने से इंकार कर दिया था। हज़रत इमाम हुसैन की शहादत हमें सिखाती है कि हमें कभी भी ज़ालिमों के सामने अपना सर नहीं झुकाना चाहिए। अखतर सलमानी ने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन के किरदार को जिंदा रखना बहुत ज़रूरी है, । अखतर सलमानी ने कहा कि जिस दिन भी हम हज़रत इमाम हुसैन के कदमताल पर चलने की ठान लेंगे उसी दिन हक़ का बोल बाला हो जाएगा, दुनिया में फैले अंधकार का खात्मा हो जाएगा। अख्तर सलमानी ने लोगों से अपील की के कोरोना महामारी के चलते खुदा से निजात की दुआ करें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर प्रशासन का पूरा सहयोग करें इस मौके पर कारी आज़म जमशेर , समाजसेवक कामिल खान आदि मौजूद थे।
फोटो: सय्यद याक़ूब हुसैन नक़वी और अखतर सलमानी व अन्य जानकारी देते हुए,,,,,।

