एच.एम.वी. में हिन्दी एवं संस्कृत विभाग द्वारा अंतर्राष्ट्रीय वैबिनार का आयोजन
जालन्धर : मनवीर सिंह वालिया
हंस राज महिला महा विद्यालय के हिंदी और संस्कृत विभाग ने प्रिंसिपल प्रो.डॉ. श्रीमती अजय सरीन के कुशल मार्गदर्शन में वैश्विक परिदृश्य में हिन्दी एवं संस्कृत का भविष्य विषय पर संयुक्त रूप से अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया। वेबिनार श्रृंखला की संचालक डॉ. रमनीता सैनी शारदा ने वेबिनार का संक्षिप्त परिचय देते हुए हिन्दी व संस्कृत विभाग को इस वेबिनार के आयोजन हेतु बधाई दी गई। उन्होंने कहा कि यह वेबिनार महामारी के समय में ज्ञानवर्धन का एक सशक्त साधन हैै। इस श्रृ़ख्ला को आगे बढ़ाते हुए आज का वैबिनार वैश्विक परिदृष्य में हिन्दी एवं संस्कृत का भविष्य पर विस्तारपूर्वक चर्चा का एक प्रयास है। प्राचार्य प्रो. डॉ.श्रीमती अजय सरीन ने भी सभी विशेषज्ञों और देश विदेश से जुड़े प्रतिभागियों का हार्दिक अभिन्नदन किया। उन्होंने विभागाध्यक्षा और उनकी समूची टीम को आयोजन हेतु बधाई दी। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि आज का विषय वास्तक में बहुत मर्मस्पर्शी है। यह प्रश्र सदैव से चर्चा का विषय रहा है। कोई भी भाषा किसी अन्य भाषा की विरोधी नहीं होती। संस्कृत हमारी मूल भाषा रही है। यह एक तर्कपूर्ण भाषा है लेकिन पिछले कई दशकों यह भाषा लुप्त होती जा रही है। डीएवी संस्था का सदैव संस्कृत व हिन्दी के प्रचार-प्रसार में अमूल्य योगदान रहा है। एचएमवी संस्था द्वारा प्रत्येक वर्ष प्रकाशित प्लैनर में संस्कृत भाषा के श्लोक के साथ-साथ उसका अर्थ हिंदी में भी दिया जाता है ताकि पाठक इसका अर्थ समझ सकें। यदि हम इन भाषाओं को अपनी बातचीत, लेखनी का हिस्सा बनाएँ तभी हम इनका यथायोग्य स्थान प्रदान करने में सक्षम बनेंगे। इस अवसर पर विशेषज्ञ स्वरूप प्रो डॉ आनंदवर्धन, सोफिया विश्वविद्यालय, सोफिया बुल्गारिया, डॉ अजय शर्मा, सुप्रसिद्ध साहित्यकार, डॉ लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश और डॉ ऋषिराज, संस्कृत विभाग, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज दिल्ली विश्वविद्यालय से उपस्थित रहे जिनके द्वारा वैश्विक परिदृश्य में हिन्दी एवं संस्कृत के भविष्य पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। डॉ। आनंदवर्धन ने कहा कि हिंदी का क्षेत्र विस्तृत व व्यापक है इसलिए ज्ञानात्मक बनें। मीडिया के क्षेत्र में हिंदी अग्रणीय है। डॉ अजय शर्मा ने कहा कि हमारा मूल कत्र्तव्य है कि इस वैदिक संस्कृत एवं हिन्दी का प्रचार-प्रसार करें। हिन्दी को लिंक भाषा से राष्ट्र भाषा बनाएँ, संस्थाओं को अनुवाद के कुछ पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए ताकि अनुवाद कार्य को बढ़ावा मिले एवं भाषाओं का विकास हो। डॉ लक्ष्मण प्रसाद गुप्ता ने कहा कि आज के युग में भाषा भावों की अभिव्यक्ति से अधिक तकनीकी बन गई है। हिन्दी भाषा की स्थिति बेहद अच्छी है। इसका का व्यापक बाजार है इसलिए इसका विकास करें। डॉ ऋषिराज ने कहा कि संस्कृत को सत्यम, शिवम, सुन्दरम की अभिव्यक्ति के माध्यम से पल्लवित व पुष्पित किया जा सकता है। इस अवसर पर डॉ कंवलदीप कौर, कोऑर्डिनेटर आईक्यूएसी ने भी आयोजकों को बधाई दी एवं इस प्रेरणादायक विषय से श्रोतगणों को लाभान्वित होने हेतु प्रेरित किया। वेबिनार का संचालन हिन्दी विभागाध्यक्षा डॉ ज्योति गोगिया ने किया। उन्होने समस्त गणमान्य विशेषज्ञों द्वारा दिए गए अमूल्य विचारों हेतु उनका धन्यवाद भी किया एवं कहा कि इस प्रकार के वैबिनार सदैव उर्जावान कर प्रेरणा प्रदान करते हैं। संस्कृत विभागाध्यक्षा डॉ मीनू तलवार ने अंत में धन्यवाद प्रस्तुत करते हुए समस्त बुद्धिजीवियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर श्रीमती पवन कुमारी और डॉ दीप्ति धीर भी उपस्थित थीं।

