पंजाब अस्पताल प्रबंधन की बड़ी लापरवाही बदल गए कोरोना संक्रमितों के शव

अमृतसर : प्राईम पंजाब

कोरोना काल में ऐसे कई मामले भी सामने रहे है। जिन को सुन देख कर हर व्यक्ति को गहरी सोच में डूब जाता है। कुछ दिन पहले अमृतसर के एक प्राईवेट अस्पताल और लैबोरटेरी पर मिलीभुगत से लोगों का शोषण करने के आरोप लगे थे। आरोप है कि लैब के संचालक निगेटिव रिपोर्ट वाले मरीज को करोना पाजिटिव होने की फर्जी रिपोर्ट दे कर उक्त अस्पताल में भेज देते थे। विजिलेंस ने इस बारे में मामला दर्ज किया है और सिट मामले की जांच कर रही है। अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित गुरु नानक देव अस्पताल में कोरोना के मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इस अस्पताल के स्टाफ पर लापरवाही के बड़े आरोप लग चुके है।

अब इस अस्पताल के स्टाफ की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। वहां पर कोरोना संक्रमित दो मरीजों के शव आपस में बदल दिए गए। अृमतसर की महिला का शव होशियारपुर भेज दिया गया जबकि होशियारपुर के एक बुजुर्ग का अंतिम संस्कार अमृतसर में उक्त महिला के परिजनों ने कर दिया। जबकि दूसरे का संस्कार करने से पहले जब परिजनों ने देखा तो हंगामा हो गया। हुआ यूं कि मुकेरियां के पास पड़ते गांव टांडा रामसहाय के प्रीतम सिंह (92) गत 1 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव आए थे। 18 जुलाई की सुबह उनकी मौत हो गई। अमृतसर से जो शव मुकेरियां के श्मशान घाट भेजा गया वो महिला का निकला।

फिलहाल परिजनों में भारी रोष है और उनका कहना है कि और वे तभी शव देंगे। जब परिजन का शव उन्हें सौंपा जाएगा। वहीं, प्रीतम सिंह का संस्कार कर दिया गया है। पॉजिटिव महिला पद्मा (37) साल डैम गंज अमृतसर प्रीतम सिंह (92) की मौत शुक्रवार रात हुई थी। दोनों के शव मॉर्चरी में पैक कर रख दिए गए थे। शनिवार को दोनो शवों को परिजनों के हवाले कर दिया गया। महिला के परिजनों ने प्रीतम का शव पैक ही संस्कार कर दिया जबकि प्रीतम के घरवालों ने संस्कार करने से उनका पहले मुंह देखा तो शव महिला का था।

जिसके बाद उनके होश उड़ गए और इसके बाद पूरे मामले को खुलासा हुआ शव पर टैग लगा था प्रीतम सिंह का, खोला तो निकला महिला का होशियारपुर में जो बॉडी लाई गई थी उस पर प्रीतम सिंह का टैग लगा था। जब परिजनों ने बॉडी बैग खोला तो बॉडी महिला की निकली।

4 दिन पहले भी बजुर्ग प्रीतम सिंह की मौत की दे दी थी गलत सूचना

प्रीतम के पोते प्रितपाल सिंह ने बताया कि करीब 4 दिन पहले उनके घर पर फोन आया कि दादा प्रीतम की मौत हो गई है।  लेकिन बाद में फोन आया कि वह ठीक हैं। 18 जुलाई सुबह 11 बजे फिर फोन आया कि उनकी बीती रात 10 बजे मौत हो गई। जब संस्कार करने के लिए शव मुकेरियां के पास गांव टांडा रामसहाय के श्मशानघाट पहुंचा तो उनके कुछ परिवारिक सदस्यों ने भी पीपीई किटें डाली हुई थीं। शक होने पर उन्होंने शव देखने को कहा। जैसे ही काले बैग की जीप खोली तो वहां पर महिला की बॉडी निकली। इसके बाद हडक़ंप मच गया। मौके पर कई आलाधिकारी पहुंच गए। इस मामले में लापरवाही करने के जिम्मेंदार अस्पताल कर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है।

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